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قديم 03-09-2017, 10:19 AM   رقم المشاركة :[1]
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افتراضي लेपचा (जनजाति)

लेपचा (जनजाति)


लेपचा (जनजाति), जिसे रोंग भी कहते हैं। ये भारत के प्रमुख जनजातियों मे से एक हैं

निवास क्षेत्र[संपादित करें]

यह पूर्वी नेपाल, पश्चिमी भूटान,तिब्बत के कुछ क्षेत्र तथा भारत के सिक्किम और पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंगजिले के प्रमुख निवासी हैं। एक अनुमान के मुताबिक इनकी संख्या 46 हजार है। अर्थात भारत के अन्य क्षेत्रों में 11 हजार, सिक्किम मे 25हजार और भूटान मे 10 हजार के आसपास, तिब्बत और नेपाल में इनकी संख्या नगण्य है।[4]
समाज[संपादित करें]

ये सिक्किम के सबसे पुराने निवासी माने जाते हैं, लेकिन इन्होने 14 वीं शताब्दी और उसके बाद आए भूटिया लोगों की संस्कृति के कई तत्वों को अपना लिया है। भूटिया मुख्यत: ऊंचे पहाड़ों के पशुपालक होते हैं, जबकि लेपचा सामान्यत: दूरस्थ घाटियों में रहते हैं। जहां इन दोनों समूह में कुछ अंतर्विवाह हुये हैं वहीं वे अलग रहने और अपनी भाषाएँ बोलने का प्रयास करते हैं, जो तिब्बत भाषा की बोलियाँ है। किसी भी समूह का नेपाली हिन्दू अधिवासियों से कोई संबंध नहीं है, जो 18 वीं शताब्दी में सिक्किम में आए और 20 वीं शताब्दी के अंत में जनसंख्या का दो-तिहाई भाग हो गए थे।[5]
संस्कृति[संपादित करें]



लेपचा मुख्यत: एक ही विवाह करते हैं, हालांकि एक विवाहित पुरुष अपने छोटे अविवाहित भाई को अपने साथ रहने के साथ-साथ अपने खेत और अपनी पत्नी की साझेदारी हेतु निमंत्रित कर सकता है। कभी-कभी एक पुरुष की एक या अधिक पत्नियाँ भी हो सकती है। लेपचा अपना मूल पितृवंश के आधार पर मानते हैं और उनके बड़े पितृसत्तात्मक वंश होते हैं।
धर्म[संपादित करें]

लेपचा, भूटिया द्वारा तिब्बती बौद्ध धर्म में परिवर्तित किए गए थे, लेकिन अब भी लेपचा लोग आत्माओं के कूलोन व उनके ओझाओं की अपनी पुरानी मान्यता को मानते हैं, जो रोगों का उपचार करती है, देवताओं से मध्यस्थता करती है और जन्म-विवाह तथा मृत्यु के समय की जाने वाली रस्मों में प्रधान होती है।
भाषा/बोली[संपादित करें]

लेपचा भारत में रहने वाली एक प्रमुख जनजाति है और इस जनजाति के द्वारा बोली जाने वाली जनजातिय भाषा लेप्चा कहलाती है।
भोजन[संपादित करें]

परंपरागत रूप से शिकारी और भोजन संग्राहक लेपचा जनजातीय लोग अब कृषि व पशुपालन में भी संलग्न है।

التعديل الأخير تم بواسطة د ايمن زغروت ; 07-09-2017 الساعة 11:21 AM
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