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قديم 03-09-2017, 10:59 AM   رقم المشاركة :[1]
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افتراضي भील

भील

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भील मध्य भारत की एक जनजाति है। भील जनजाति के लोग भील भाषा बोलते है। भील, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और राजस्थान में एक अनुसूचित जनजाति है, अजमेर में ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के खादिम भी भील पूर्वजों के वंशज हैं। भील त्रिपुरा और पाकिस्तान के सिन्ध के थारपरकअर जिले मे भी बसे हुये हैं।
खादिम अजमेर[संपादित करें]

अजमेर स्थित हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती रहमतुल्लाह की दरगाह के खादिम भील पूर्वजों के वंशज है , इनकी दो शाखाएँ है एक सैयदजादगान जो की स्वयं को ख्वाजा फखरुद्दीन के वंशज बताते है, ख्वाजा फखरुद्दीन जिनका मूल नाम लाखा भील था और जिन्होंने ख्वाजा साहब के चेले बन कर इस्लाम कबूल कर लिया था, इसी प्रकार लाखा भील के सगे भाई के वंशज है शैख़जादगान समुदाय के लोग। खुद को शैखजादा बताने वाले खादिम स्वय को मोहम्मद यादगार का वंशज बताते हैं मोहम्मद यादगार का नाम टेका भील था था तथा यह भी ख्वाजा साहेब के मुरीद बनकर इस्लाम धर्म में शामिल हो गए थे। [5]
निवास क्षेत्र[संपादित करें]



भील शब्द की उत्पत्ति "बिल" से हुई है जिसका द्रविड़ भाषा में अर्थ होता हैं "धनुष"। भील जाति दो प्रकार से विभाजित है- 1.उजलिया/क्षत्रिय भील- उजलिया भील मूल रूप से वे क्षत्रिय है जो सामाजिक/मुगल आक्रमण के समय जंगलो में चले गए एवं मूल भीलों से वैवाहिक संबंध स्थापित कर लेने से स्वयं को उजलिया भील कहने लगे मालवा में रहने वाले भील वही है। इनके रिति रिवाज राजपूतों की तरह ही है। इनमें वधूमूल्य नहीं पाया जाता और ना ही ये भीली भाषा बोलते है। इनके चेहरे और शरीर की बनाबट, कद काठी प्राचीन राजपूतों से मिलती है। 2.लंगोट भील-ये वनों में रहने वाले मूल भील है इनके रीति रिवाज आज भी पुराने है। इनमें वधूमूल्य का प्रचलन पाया जाता है। म.प्र. के निमाड में रहने वाले अधिकांश जनजाति यही है।

التعديل الأخير تم بواسطة د ايمن زغروت ; 07-09-2017 الساعة 11:16 AM
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